हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लिख रहे हैं विकास की नई इबारत
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक और जलवायु संबंधी प्रतिकूलताओं केे कारण इन क्षेत्रों में विकास संबंधी गतिविधियां चुनौतियों से भरी रहती है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे दुर्गम, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम आबादी, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और लंबे समय तक रहने वाली बर्फबारी विकास कार्यों तथा जनसेवाओं की पहुंच को चुनौतीपूर्ण बनाती रही हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जनजातीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हिस्सा हैं जबकि यहां केवल 3.92 लाख लोग रहते हैं जो प्रदेश की कुल आबादी का 5.71 प्रतिशत हैं। इन क्षेत्र...








